प्रभु केवल हमारा प्रेम भाव देखते हैं और प्रेम के कारण रीझ जाते हैं । कभी-कभी प्रभु प्रेम की प्रबलता देखने पर अटपटी बातों पर भी रीझ जाते हैं । एक महिला थी जो प्रभु की भक्त थी और प्रभु की खूब सेवा-पूजा करती थी । वह प्रभु को नित्य याद करती रहती थी । एक बार उसे दोपहर में ही हिचकी आने लगी और कुछ देर में उसकी बेटी ससुराल से उससे मिलने आ पहुँची । महिला ने हिचकी की बात बताई तो उसकी बेटी ने कहा कि मैं ही तुम्हें याद कर रही थी इसलिए तुम्हें हिचकी आ रही थी । बेटी मिलकर वापस चली गई । महिला सोच में पड़ गई कि मैं तो प्रभु को आठों याम याद करती रहती हूँ तो प्रभु को भी हिचकी आती होगी और तकलीफ होती होगी । महिला ने निश्चय किया कि प्रभु को तकलीफ न हो इसलिए आज से मैं प्रभु को याद नहीं करूंगी । प्रभु उस महिला की इस बात से रीझ गए कि प्रभु को तकलीफ न हो इसकी कितनी चिंता महिला को है । प्रभु ने प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिया और अपने में लीन करके अपने धाम ले गए ।
प्रभु प्रेम भाव को देखते हैं और अगर प्रभु के लिए लिया नियम कभी टूट भी जाता है तो प्रभु उसकी पूर्ति स्वयं करते हैं । हमारा नियम अगर एक दिन के लिए किसी कारणवश टूट भी जाए पर अगर भाव खंडित नहीं हुआ तो प्रभु उस भाव को स्वीकारते हैं । एक सेठजी का नियम था कि रोज शाम को मंदिर जाकर प्रभु को दो लड्डू भोग लगाकर अर्पित करना । नियम का उन्होंने जीवनभर निर्वाह किया और कभी खंडित नहीं होने दिया । एक बार व्यापार के लिए बाहर गए हुए थे और शाम को बड़ी तेज वर्षा के कारण पानी भरने के कारण अपने गांव नहीं लौट पाए । शाम को प्रभु के लिए लड्डू लेकर मंदिर जाना था वह नियम आज टूटने वाला था । उनके मन में बहुत वेदना हुई और उन्होंने मन-ही-मन लड्डू प्रभु को अर्पण किया । वे जब गांव पहुँचे और दूसरे दिन सुबह मंदिर क्षमा मांगने गए तो मिठाई की दुकान वाले ने उन्हें आवाज देकर बुलाया । उस दुकानदार ने कहा कि आप कल शाम के दो लड्डू के पैसे बाकी छोड़कर गए हैं । सेठजी को समझते देर न लगी कि प्रभु ने स्वयं आकर लड्डू लेकर भोग लगा लिया और उनके नियम को टूटने नहीं दिया ।