प्रभु की कृपा की प्रतीक्षा और इंतजार करने वाले
को प्रभु की कृपा निश्चित जीवन में मिलती है । पर जो प्रभु की कृपा की प्रतीक्षा
नहीं करता और निराश होकर चला जाता है वह प्रभु कृपा से वंचित रह जाता है ।
एक व्यक्ति रोज दफ्तर से 7 बजे घर आता और दुकान
से बिस्कुट के कुछ पैकेट लाकर घर के बाहर कुत्तों को खिला देता । ऐसा नियम हो गया तो रोज
7 बजे उसके घर के बाहर कुत्ते उसका इंतजार करते । वह रोज आता और बिस्कुट खिलाता था
। एक दिन दफ्तर में किसी कारणवश उसके मालिक ने उसे बहुत डांटा । उसका मूड खराब
होने के कारण और विलंब भी होने के कारण वह बिस्कुट लेकर नहीं आया और देखा कि
कुत्ते इंतजार में बैठे हैं । मूड खराब था इसलिए सीधे वह घर में जाकर बिस्तर पर
लेट गया । रात 9 बजे उसने दरवाजा खोलकर देखा तो सभी कुत्ते चले गए थे बस एक कुत्ता
इंतजार में बैठा था । उसे बहुत दया आ गई और वह घर पर उपलब्ध बिस्कुट का बड़ा डब्बा
लेकर बाहर आया और इकलौते कुत्ते को जो निराश होकर नहीं गया था और प्रतीक्षा कर रहा
था उसे भरपेट बिस्कुट खिलाए । इंतजार का फल
मीठा होता है और प्रभु कृपा के इंतजार का फल तो असीम होता है । इंतजार और विश्वास
करने पर सावन के मेघ की तरह प्रभु की कृपा हम पर बरसती है ।