सुख और दुःख सबके जीवन में आते हैं । सभी को जीवन में किसी-न-किसी समय सुख या दुःख का सामना करना पड़ता है । संतों और भक्तों ने सुख से ज्यादा दुःख की महिमा बताई है । एक संत एक कथा सुनाते थे । एक बार अचानक एक मोड़ पर सुख और दुःख की मुलाकात हो गई । दुःख ने सुख से कहा कि तुम कितने भाग्यशाली हो कि संसार के लोग तुम्हें प्राप्त करने की कोशिश में जीवन भर लगे रहते हैं । सुख असली बात जानता था और उसने बड़े विनम्र होकर दुःख को बड़ा मार्मिक उत्तर दिया । सुख ने मुस्कुराते हुए दुःख से कहा कि भाग्यशाली मैं नहीं तुम हो । दुःख ने हैरानी से पूछा कैसे ? तो सुख ने ब ड़ी ईमानदारी से सच्चा जवाब दिया । सुख ने कहा कि मुझे पाकर सभी लोग प्रभु को भूल जाते हैं और मेरा उपभोग करने में ही जीवन और यहाँ तक कि बुढ़ापा भी बिता देते हैं । पर इसके ठीक विपरीत तुम्हें पाकर लोग तुरंत प्रभु को याद करते हैं और प्रभु की शरण में चले जाते हैं । तो जो प्रभु को बिसरा दे वह बड़ा या जो प्रभु से मिला दे वह बड़ा । इसलिए ही संतों और भक्तों ने जीवन में दुःख का सहर्ष स्वीकार किया और प्रभु प्राप्ति में सहयोग के लिए दुःख को धन्यवाद दिया है ।
www.devotionalyouth.in - GOD dedicated website for Youth.