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Showing posts from March, 2025

75. अनीति का धन

अनीति से कमाया धन अपने साथ बहुत विकार लेकर आता है   । वह पूरी तरह से अनर्थ करने में सक्षम होता है । इसलिए सात्विक धन जो धर्मयुक्त है उसे ही अर्जित करना चाहिए । पुराने समय की बात है । एक जौ हरी एक गांव से दूसरे गांव जा रहा था । रास्ते में एक वृक्ष के नीचे खाना खाने रुका और उसका थैला जिसमें बहुमूल्य रत्न, हीरे और स्वर्ण मोहरे थी वह गलती से वहीं छूट गया । एक संत अपने शिष्य के साथ उधर से निकले । शिष्य की नजर उस धन पर पड़ी । उसने कहा कि इसे ले लेते हैं और सत्कर्म जैसे साधु सेवा, भंडा रे आदि में लगाते हैं तो वर्षों तक यह धन चलेगा । संत ने कहा कि यह अनीति का धन होगा इसलिए अनर्थ ही करेगा । किसी दूसरे का कमाया धन हमारे पास चोरी के रूप में अनीति से आएगा तो वह हमारा बिगाड़ ही करेगा । संत ने शिष्य को शिक्षा देने के लिए एक युक्ति की । वे दोनों एक पेड़ के पीछे छुप गए और संत ने कहा कि देखो आगे क्या होता है । तभी राजा के चार सिपाही घोड़े पर बैठकर उधर से गुजरे । उन्होंने धन देखा तो उनकी नियत बिगड़ गई । उन्होंने आपस में बात की कि राजकोष में जमा करने के बजाए हम चारों इसे आपस में बांट लेते हैं । ...